District & Session Court Sagar
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Sagar

सागर जिले का न्यायिक इतिहास करीब २०० वर्ष पुराण है। सागर सरोज नामक पुस्तक जिसके रचनाकार रे बहादुर हीरा लाल डिप्टी कमिश्नर नरसिंहपुर द्वारा लिखित १९२२ की पृष्ठ -५ पर लेख किया है ।ढाई हज़ार साल पूर्व चन्द्रगुप्त के शासनकाल में भी अमरकंटक राज्य के तहत यह जिला था। बिन्दुसार,अशोक,विश्वामित्र संत जातियां , तथा गुप्त कल में सन ३२० वीं सदी में समुद्रगुप्त सागर जिले से होकर दिव्य विजय को निकला। बीना नदी के किनारे एरन में सोभोम बनाया। उपरांत विक्रमादित्य ,हर्षवर्धन और चंदेल परमार गौंड राजा सागर में राज कर चुके हैं।गौंड राजाओं ने सौ  साल सन १६३४ में हृदय शाह के लड़के जुभर सिंह ने राजधानी मंडल से हटाकर राजगाव ले लिया। गौंड राजाओं का पतन १७८९ में हुआ। सागर के मराठों के द्वारा मनहरशाह को गद्दी पर बैठाया। लेकिन मराठों के विरोध करने के कारण खुरई  के किले में कैद होकर मृत्यु हो गई। उस समय सागर में करीब १७३२ से आए मराठा काफी शसक्त हो गये थे। रघुनाथ राव आवासदिव के शासन में सागर जिला था उस समय न्यायलय की स्थापना सागर में हो चुकी थी। १७९८ में राजा रघुजी,घोसला,नागपुर को उस समय धामोनी में भी घोषला जी मिल गई थी।रघुनाथ राव १८०२ में सुरलोकगामी हो गए थे। वे लाओलाद थे ,उनकी रानियों ने विनायक राव की सहायता से शासन किया था। १८१४ में सिंधिया ने सागर पर शासन किया। विनायक राव को कैद किया और ७५ हज़ार लेकर छोड़ दिया।१८१८ में पेशवा ने सागर तथा दमोह के इलाके अंग्रेजों को दे दिये। सन १७९९ के पूर्व अमीर खां पिडारे ने काफी उत्पाद मचाया तथा सन १७९९ में सागर को लूटकर आग लगा दी उसे पकड़ा गया। न्यायलय के समक्ष पेस किया गया, तथा गणेशन को पकड़ने के लिए उसे छोड़ा गया अमीर खां ने पकड़ा और फांसी की सजा सुनाई।उस समय डकैतियां भी पकड़ी जिनके फैसले भी हुए। सन  १८१८ के बाद पांच साल बंदोबस्त में ,२० साल बंदोबस्त १८५३ में ३० साल बंदोबस्त ,उसके बाद १९१३-१४ से १९२३-२४ दस साल बंदोबस्त लागू किया गया।

                                                                              सन १८४२ में मधुकरशाह ,जवाहर सिंह और गणेशन पर सागर की दीवानी अदालतों  में डिक्री इजराय की गई।