District And Session Court, Shivpuri (M.P.)

Shivpuri

मध्‍यप्रदेश राज्‍य के ग्‍वालियर संभाग के अन्‍तर्गत शिवपुरी जिला अपने ऐतिहासिक महत्‍व के साथ-साथ मध्‍यप्रदेश राज्‍य के पर्यटक स्‍थलों में से एक दर्शनीय पर्यटक स्‍थल के रूप में भी जाना जाता हैा शिवपुरी जिले के ऐतिहासिक प्रष्‍ठों में मध्‍यकालीन भारतीय इतिहास से प्रारम्‍भ करते हुए, आधुनिक काल के विभिन्‍न चरणों में हुए तत्‍कालीन राजनैतिक, सामाजिक, सांस्‍कतिक एवं धार्मिक उतार-चढ़ाव के लक्षण द्रष्टिगोचर होते हैं।

यह माना जाता है कि शिवपुरी जिले का नाम भगवान ''शिव शंकर'' के उपसर्ग शिव से लिया गया है। जिला शिवपुरी के अन्‍तर्गत करैरा, कोलारस, पोहरी, पिछोर एवं खनियाधाना न्‍यायालयीन विकासखण्‍ड तथा नरवर एवं बदरवास उप विकासखण्‍ड सम्मिलित हैं। उप विकासखण्‍ड नरवर जिसका काफी ऐतिहासिक महत्‍व है। शिवपुरी का माधव राष्‍ट्रीय उद्यान आकर्षक पर्यटक स्‍थल है।

जिला एवं सत्र न्‍यायालय भवन का उद्घाटन माननीय न्‍यायमूर्ति श्री एन0के0 सिंह न्‍यायाधिपति म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय के कर कमलों द्वारा एवं माननीय श्री शिवप्रताप सिंह राज्‍य मंत्री पशु धन एवं डेयरी विभाग म.प्र. शासन की अध्‍यक्षता में दिनांक 10.05.1987 को सम्‍पन्‍न हुआ।

भगवान ''शिव'' से अपने नाम निकला है। यह नाम ''SIPRI'' से पहले जाना जाता था। शिवपुरी जगह पहले सम्राट अकबर ने इस जगह पर रोक दिया है करने के लिए कहा गया है जब 1564 में मुगल काल के दौरान एक उल्‍लेख पाया। उस अवधि के दौरान यह Narwar सरकार का एक हिस्‍सा बनाया है। Narwar या Narbar शिवपुरी, जिला मुख्‍यालय से 43 किलोमीटर की दूरी पर स्थित 1991 की जनगणना के अनुसार 6745 व्‍यक्तियों की आबादी के साथ एक तहसील है। इसके पीछे एक बहुत बड़ा प्राचील किले और इतिहास का खजाना है। अपने मुख्‍यालय के शिवपुरी में किया गया था। हालांकि, जिला ग्‍वालियर स्‍टेट के समय के दौरान Narwar जिले के रूप में जाना जाता था। यह सिंधिया के द्वारा लिया गया था जब शिवपुरी 1804 तक Kachhawaha राजपूतों के साथ बने रहे, यह 1817 में अंग्रेजी से कब्‍जा कर लिया है, लेकिन सिंधिया के अगले साल के लिए लौट आए और यह तब से ग्‍वालियर राज्‍य का एक हिस्‍सा बनने के लिए जारी किया गया था। 1859 में यह महान भारतीय नेता तात्‍या टोपे वर्तमान कलेक्‍ट्रेट के पास फांसी पर लटका दिया गया था। कहा जाता है कि महाराजा माधव राव सिंधिया ने शिवपुरी के विकास की ओर अधिक ध्‍यान दिया तथा एक बड़े महल का निर्माण किया है और यह भी शहर का विकास किया, यह ग्‍वालियर राज्‍य और सरकारी कार्यालयों की ग्रीष्‍मकालीन राजधानी गर्मियों के महीनों में यहां स्‍थानांतरित कर दिया गया था। शिवपुरी तत्‍कालीन मध्‍य भारत में एक जिले के रूप में गठन किया और 1951 के बाद से व्‍यावहारिक रूप से कोई परिवर्तन नहीं के साथ के रूप में इस तरह के जारी किया गया था।

शिवपुरी जिला मध्‍य प्रदेश राज्‍य के अंतर्गत आता है। जिला मुख्‍यालय शिवपुरी के अन्‍तर्गत करैरा कोलारस, पोहरी, पिछोर एवं खनियाधाना न्‍यायालयीन विकासखण्‍ड आते हैं। जिला शिवपुरी का उप विकासखण्‍ड नरवर है, जिसका काफी ऐतिहासिक महत्‍व है। नरवर के पूर्व में कालीन सिंध नदी बहती है। जिला मुख्‍यालय शिवपुरी को माधव राष्‍ट्रीय उद्यान के कारण भी जाना है। जो कि घने जंगल घास के मैदान और झील के लिए प्रसिध है। सांख्‍य सागर और माधव सागर झील मनियर नदी पर सन 1918 में बनी जो कि इसी राष्‍ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आती है। सैलिंग क्‍लब एक प्रसिद आकर्षक पर्यटक स्‍थल है। सांख्‍य सागर झील के किनारे बना हुआ है।

जिला एवं सत्र न्‍यायालय भवन का उदघाटन माननीय न्‍यायमूर्ति श्री एन.के. सिंह न्‍यायाधीश म.प्र. उच्‍च न्‍यायालय के कर कमलों द्वारा एवं माननीय श्री शिवप्रताप सिंह राज्‍य मंत्री पशुधन एवं डेयरी म.प्र.शासन की अध्‍यक्षता में दिनांक 10.05.1987 तदानुसार वैशाख शुक्‍ल 12 सम्‍वत 2044 को सम्‍पन्‍न हुआ।

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