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Sidhi

History

गहरे वनों, विन्ध्य पर्वत की कैमोर केंहजुआ की पर्वत श्रृंखलाओं तथा देश प्रदेश की प्रमुख नदियों जैसे सोन, गोपदबनास, महान आदि से घिरे इस जिले में आज भी आवागमन की सुविधा आज भी उपलब्ध नहीं है। 100 वर्ष पूर्व तो आवागमन का साधन पैदल मार्ग ही हुआ करता था, लेकिन इन विषमताओं के बावजूद रीवा रियासत के अंतर्गत रहे सीधी जिले का न्यायिक इतिहास काफी पुराना है। सन् 1922 के पूर्व ही सीधी जिले के चुरहट इलाके के अंतर्गत स्थित गांव ’’बघउ’’ जो कि वर्तमान सीधी मुख्यालय से लगभग 25 किमी. की दूरी पर स्थित है, जहां पर प्रथम न्यायिक मजिस्ट्रेट की न्यायालय संचालित होती थी। बाद में सन् 1927 में रीवा रियासत के महाराजा श्री गुलाब सिंह जूदेव द्वारा सीधी मुख्यालय में गोपदबनास तहसील अंतर्गत गांव कोतरकलॉ में मजिस्ट्रेट भवन का निर्माण कराया गया एवं इसी भवन में न्यायालय लगने लगा। इसके ठीक पीछे पूर्व की तरफ मजिस्ट्रेट के निवास हेतु आवास निर्मित किया गया, जो आज भी जीर्ण अवस्था में मौजूद है। तीन-चार साल बाद इसी मजिस्ट्रेटी भवन के ठीक सामने सन् 1930 में ’’जज्जी’’ भवन (जिला एवं सत्र न्यायाधीश का न्यायालय) का निर्माण कराया गया। इसी जज्जी भवन के ठीक पीछे न्यायाधीश महोदय का आवासीय भवन निर्मित कराया गया। आवास भवन सन् 2012 तक स्थित रहा, अब उसके स्थान पर न्यायिक अधिकारी का नया बंगला निर्मित हो चुका है। मजिस्ट्रेटी एवं जज्जी भवन आज भी कुछ मरम्मत के साथ मौजूद है। इन्हीं मजिस्ट्रेटी व जज्जी भवनों में सन् 1985 तक न्यायालय संचालित होती रही है। इस दौरान कई प्रतिष्ठित व ख्याति लब्ध न्यायाधीशों द्वारा न्यायिक सेवाएं सीधी वासियों को प्रदान की गई हैं। सीधी जिले के प्रथम न्यायाधीश रीवा रियासत के श्री सीता प्रसाद जी थे। रीवा तलहटी के गांव के श्री वासुदेव गंगाधर दीक्षित भी न्यायाधीश रहे हैं। उनके बाद श्री रामकृष्ण पाण्डेय जी, जो कि रीवा स्थित पाण्डेय टोला के निवासी थे, न्यायाधीश हुये फिर चन्द्रिका प्रसाद जी सीधी में न्यायाधीश हुये। सीधी की जज्जी तत्कालीन विन्ध्य प्रदेश के रीवा उच्च न्यायालय के अधीन हुआ करता था। रीवा उच्च न्यायालय में भी शंकर सिंह बघेल चीफ जज हुआ करते थे। इनके बाद श्री मोघा साहब रीवा उच्च न्यायालय के जज हुये, जो सीधी प्रवास पर आये थे। सीधी में दीवानी एवं फौजदारी मामलों की जानकारी लेने के बाद लम्बित मामलों की अल्प मात्रा को देखते हुये सीधी की रेगुलर जज्जी को खत्म कर दिये थे। उस समय सीधी के न्यायाधीश श्री चन्द्रिका प्रसाद जी हुआ करते थे।

इसके बाद बहुत दिनो तक रीवा से सीधी में न्यायाधीश 15 दिवस के लिये लिंक कोर्ट किया करते थे। कालांतर में सीधी जिला शहडोल जिले के अंतर्गत कर दिया गया, फिर शहडोल एवं उमरिया से न्यायाधीश महोदय सीधी में 15 दिन के लिये लिंक कोर्ट करने लगे। सन् 1969 में अपर जिला न्यायाधीश का न्यायालय सीधी में नियमित कर दिया गया। सन् 1969 से सन् 1975 तक सीधी में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश का न्यायालय निरंतर संचालित रहा।

सीधी न्यायिक जिले का स्वरूप एवं भौगोलिक स्थिति

सीधी न्यायिक जिला म.प्र. के पूर्वोत्तर दिशा में स्थित है। सीधी के उत्तर-पश्चिम में रीवा न्यायिक जिला तथा पश्चिम दिशा में सतना न्यायिक जिला एवं दक्षिण-पश्चिम दिशा में शहडोल न्यायिक जिला स्थित है। सीधी जिले के पूर्वोत्तर दिशा में उत्तरप्रदेश एवं पूर्व-दक्षिण दिशा में वर्तमान छत्तीसगढ़ स्थित है, जो कि पहले म.प्र. का ही हिस्सा हुआ करता था। सन् 2010 में सीधी न्यायिक जिले का पूर्व भाग अलग कर नया न्यायिक जिला सिंगरौली की स्थापना की गई है।

सन् 1975 में सन् न्यायिक जिला स्थापित होने के पूर्व सीधी जिले में सीधी मुख्यालय के अतिरिक्त व्यवहार न्यायाधीश के न्यायालय भी तहसील स्तर पर संचालित रहे हैं, जिनमें से व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 बैढ़न एवं देवसर उसके पश्चात् सन् 1985 में व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 मझौली की 7 दिवस के लिये मझौली में श्रृंखला न्यायालय की स्थापना होकर संचालित हुई। कालांतर में यह न्यायालय 15 दिवस के लिये श्रृंखला न्यायालय हो गई। उसके पश्चात् सन् 2000 से आज नियमित रूप से मझौली में व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 की न्यायालय संचािलत है। वर्तमान में मझौली में ग्राम न्यायालय की भी स्थापना हो चुकी है। इसी प्रकार मझौली में व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-1 जो कि ग्राम न्यायालय के न्याय अधिकारी का पद है तथा दो पद व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 का पद संचालित है।